Mission of School

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स्कूल का मिशन

हमारा मिशन है कि प्रत्येक छात्र को गुणवत्तापूर्ण, समग्र और मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान की जाए, जिससे वह ज्ञान, चरित्र और आत्म-निर्भरता में सशक्त बन सके। हमारा उद्देश्य छात्रों में नैतिकता, अनुशासन, देशभक्ति और सामाजिक दायित्व की भावना का विकास करना है, ताकि वे एक बेहतर नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें। हम ऐसी शिक्षण प्रणाली को अपनाते हैं जो विद्यार्थियों की रचनात्मकता, सोचने की क्षमता और नेतृत्व कौशल को प्रोत्साहित करे।

 

सम्मान समारोह

विद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह एक गौरवपूर्ण अवसर होता है, जहाँ विद्यार्थियों की असाधारण उपलब्धियों को सराहा और सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाता है। ऐसा ही एक समारोह मध्य विद्यालय कालारामपुर, जमालपुर (मुंगेर) में आयोजित किया गया, जिसमें छात्र प्रियांशु राज को उनकी उल्लेखनीय सफलता के लिए सम्मानित किया गया।

प्रियांशु ने राष्ट्रीय स्तर पर सिमुलतला आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा तथा National Merit Scholarship परीक्षा में सफलता प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया। बोर्ड परीक्षा में 481/500 अंक प्राप्त कर राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त करना एक बड़ी उपलब्धि है।

इस सम्मान समारोह में विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण, अभिभावक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। मंच पर छात्र को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उसकी मेहनत और लगन को सराहा गया। शिक्षकों ने इस अवसर पर अपने विचार साझा किए और अन्य छात्रों को भी प्रेरित किया कि वे भी परिश्रम करें और सफलता प्राप्त करें। यह समारोह न केवल सम्मान का प्रतीक था, बल्कि पूरे विद्यालय के लिए प्रेरणा और उत्साह का स्रोत भी बना।

स्वास्थ्य ही धन है

जैसा कि कहा गया है – “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है।”

हमारा उद्देश्य है कि सभी बच्चों को योग, प्राणायाम और व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ, सक्रिय और निरोग बनाना। उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और इसे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना मेरा कर्तव्य है।अच्छा स्वास्थ्य ही हमें एक सशक्त शरीर और तेज़ दिमाग प्रदान करता है, जिससे हम जीवन की हर चुनौती का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकते हैं।अच्छा स्वास्थ्य न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी हमारे जीवन को संतुलित और आनंदमय बनाता है। स्वस्थ जीवन ही खुशहाल जीवन की कुंजी है|

स्वस्थ भारत मिशन

(स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों की सहभागिता)                                                                                          स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों को शारीरिक स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने हेतु प्रतिदिन चेतना सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों को विद्यालय की संचालन अवधि के दौरान दैनिक चर्चा का हिस्सा बनाया गया है।मैं बच्चों के साथ मिलकर विद्यालय और समाज में स्वच्छता की स्थिति सुधारने हेतु कार्य कर रहा हूँ, जिससे बीमारियों से समाज की रक्षा की जा सके। हमारा उद्देश्य है कि समाज स्वस्थ बने और हमारी आर्थिक समृद्धि निरंतर बनी रहे। हमारा भारत जल, वायु और भूमि – सभी स्तरों पर स्वच्छ एवं संतुलित बना रहे, जिससे हम सभी का जीवन सुखमय और आनंदमय हो।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और हमारी संस्कृति


मैंने हर अवसर पर विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत कराया है, जिससे बच्चों में अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो और वे अपनी संस्कृति को आगे बढ़ा सकें। इससे उनके भीतर मूल्यबोध विकसित होता है और वे समाज की सकारात्मक दिशा में सोचने लगते हैं। चाहे वह छठ पूजा हो, दशहरा, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस या किसी महापुरुष की जयंती — इन सभी अवसरों पर बच्चों को उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता से परिचित कराया जाता है, जिससे उन्हें नई सोच और दिशा मिलती है।

ईको क्लब / यूथ क्लब

ईको क्लब और यूथ क्लब के माध्यम से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित की जाती है।
इन गतिविधियों के अंतर्गत:

जल संरक्षण

जीवन और हरियाली का महत्व

ऊर्जा संरक्षण

प्लास्टिक मुक्त अभियान
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

शिक्षा में मेरी भूमिका

मेरी सकारात्मक सोच ही वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में मेरी सबसे बड़ी भूमिका है। एक सकारात्मक दृष्टिकोण समाज को नई दिशा देता है और समाज की सोच में बदलाव लाकर एक नई ऊर्जा का संचार करता है। शिक्षा समाज के निर्माण की आधारशिला है और इसमें मेरी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक शिक्षार्थी, अभिभावक, शिक्षक या नागरिक के रूप में मैं शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं मानता, बल्कि जीवन के हर पहलू से जोड़कर देखता हूँ। यदि मैं एक छात्र हूँ, तो मेरी भूमिका है कि मैं ईमानदारी से अध्ययन करूँ, जिज्ञासु बनूँ और अच्छे आचरण को अपनाकर दूसरों के लिए उदाहरण बनूँ। यदि मैं एक शिक्षक हूँ, तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं छात्रों को केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, नैतिकता, अनुशासन और सहनशीलता की भी शिक्षा दूँ। एक अभिभावक के रूप में, मेरी भूमिका होती है कि मैं अपने बच्चों को सकारात्मक वातावरण दूँ, उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करूँ और विद्यालय के साथ मिलकर उनके विकास में सहयोग करूँ।

शिक्षा क्या है?

शिक्षा वह है, जो व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाए।
“Education is the changing of behavior in a positive way.”

मैंने अपनी सेवाएं 13 दिसंबर 1995 से आरंभ की थीं, और तब से आज तक निरंतर बिना किसी रुकावट के कार्य कर रहा हूँ। मैंने स्वयं को हमेशा एक सीखने वाले और नि:स्वार्थ कार्यकर्ता के रूप में देखा है। यही सोच मुझे निरंतर कुछ नया सीखने और बच्चों के साथ जुड़ने की प्रेरणा देती है।

जब मैं बच्चों के बारे में सोचता हूँ, तो मुझे अपना बचपन याद आ जाता है — वह मासूमियत, चंचलता और नटखटपन। यह स्मृतियाँ मुझे बच्चों के व्यवहार को समझने और उनसे आत्मीयता से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

जब हम बच्चों के व्यवहार का मूल्यांकन करते हैं, तो उनसे बार-बार जिज्ञासा भरे प्रश्न सुनने को मिलते हैं —
“यह क्या है?”, “ऐसा क्यों होता है?”, “मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकता?” — यही प्रश्न उनकी जिज्ञासु प्रवृत्ति और सीखने की ललक को दर्शाते हैं।

इसलिए मेरा यह मानना है कि एक शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों की सोच को समझने, उनके साथ जुड़ने और उन्हें एक अच्छा इंसान बनाने की दिशा में काम करना ही हमारी असली जिम्मेदारी है